Friday, 10 April 2015
Tuesday, 7 April 2015
Monday, 6 April 2015
भारतातील भयानक विरोधाभास.
वाचा आणि पटलं तर बघा.
वाचा आणि पटलं तर बघा.
१) आम्ही मुलीच्या लग्नासाठी इतका खर्च करतो जितका तिच्या शिक्षणासाठी कधीच करत नाही.
२) आम्ही अशा देशात राहत आहोत जिथे पोलिसाला पाहिल्यावर आमच्या मनात सुरक्षिततेची भावना निर्माण होण्याऐवजी चिंता निर्माण होते.
३) IAS परीक्षेतील उमेदवार आपली बुद्धिमत्ता वापरून हुंडा पद्धत किती वाईट आहे यावर अतिशय छान निबंध लिहून लोकांना प्रभावित करतो आणि परीक्षा पासही होतो. आणि एक वर्षानंतर तोच उमेदवार वधूपित्याकडून एक करोड हुंड्याची मागणी करतो. कारण तो आता एक IAS ऑफिसर असतो.
४) भारतीय लोक खूप लाजाळू आहेत. तरीही भारताची लोकसंख्या १२१ कोटी आहे.
५) भारतीय लोक आपल्या मोबाईलच्या पडद्यावर स्क्रॅचेस पडू नयेत म्हणून आवर्जून त्यावर स्क्रीन गार्ड लावतात. परंतु गाडी चालवना हेल्मेट घालण्याची काळजी घेत नाहीत.
६) भारतीय समाज मुलींना बलात्कार होऊ नये म्हणून काय काळजी घ्यावी हे शिकवतो. पण मुलांना बलात्कार करू नये हे शिकवत नाही.
७) इथे अतिशय टुकार सिनेमे सुद्धा अतिशय चांगला व्यवसाय करतात.
८) इथे सनी लिओन सारख्या पोर्नस्टार मुलीला एक सिलेब्रिटी म्हणून स्वीकारले जाते. पण बलात्कार झालेल्या मुलीला सामान्य माणूस म्हणूनही स्वीकारले जात नाही.
९) इथले राजकारणी आमच्यात फुट पडतात आणि अतिरेकी आमच्यात एकी निर्माण करतात.
१०) इथे प्रत्येकजण घाईत आहे. परंतु कुणी वेळेत पोचत नाही.
११) प्रियंका चोप्रा ने मेरी कोमचे पात्र रंगवून जितका पैसा मिळवला तितका पैसा मेरी कोमला तिच्या संपूर्ण आयुष्यात मिळवता आला नाही.
१२) इथे अनोळखी व्यक्तीशी बोलणे धोकादायक मानले जाते. परंतु अनोळखी व्यक्तीशी लग्न करणे चालते.
१३) गीता आणि कुराण यांच्या नावावर भांडणाऱ्या लोकांपैकी ९९% लोकांनी ते वाचलेले नसते.
१४) इथे बूट आणि चपला वातानुकुलीत दुकानात विकल्या जातात आणि भाजीपाला रस्त्यावर विकला जातो.
Sunday, 5 April 2015
Thursday, 2 April 2015
भीमराव रामजी सकपाळ (भारतरत्न डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर).
डॉ॰ भीमराव रामजी आंबेडकर ( १४ अप्रैल, १८९१ – ६ दिसंबर, १९५६ ) एक विश्व स्तर के विधिवेत्ता थे। वे एक बहुजन राजनीतिक नेता और एक बौद्धपुनरुत्थानवादी होने के साथ साथ, भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार भी थे। वे बाबासाहेब के नाम से लोकप्रिय हैं। इनका जन्म एक गरीब अस्पृश्य परिवार मे हुआ था। एक अस्पृश्य परिवार में जन्म लेने के कारण उन्हें सारा जीवन नारकीय कष्टों में बिताना पड़ा। बाबासाहेब आंबेडकर ने अपना सारा जीवन हिंदू धर्म की चतुवर्ण प्रणाली और भारतीय समाज में सर्वव्यापित जाति व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष में बिता दिया। हिंदू धर्म में मानव समाज को चार वर्णों में वर्गीकृत किया है। जो इस प्रकार है- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। शूद्रों को उनसे उच्च वर्ग के लोग अत्यधिक कष्ट देते थे। बाबा साहब ने इस व्यवस्था को बदलने के लिए सारा जीवन संघर्ष किया। इस लिए उन्होंने बौद्ध धर्म को ग्रहण करके इसके समतावादी विचारों से समाज में समानता स्थापित कराई। उन्हें बौद्ध आंदोलन को प्रारंभ करने का श्रेय भी जाता है। बाबासाहेब अम्बेडकर को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है, जो भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है, किन्तु चूँकि वे विश्व की एक बहुत बड़ी आबादी के प्रेरणा स्रोत हैं, इस लिए उन्हें विश्व भूषण कहना ही उपयुक्त है।
प्रारंभिक जीवन
भीमराव रामजी आंबेडकर का जन्म ब्रिटिशों द्वारा केन्द्रीय प्रांत ( अब मध्य प्रदेश में ) में स्थापित नगर व सैन्य छावनी मऊ में हुआ था। वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की १४ वीं व अंतिम संतान थेI परिवार मराठी था और वो अंबावडे नगर जो आधुनिक महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले मे है, से संबंधित था। वे हिंदू महार जाति से संबंध रखते थे, जो अछूत कहे जाते थे और उनके साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था। अम्बेडकर के पूर्वज लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्यरत थे और उनके पिता, भारतीय सेना की मऊ छावनी में सेवा में थे और यहां काम करते हुये वो सूबेदार के पद तक पहुँचे थे। उन्होंने मराठी और अंग्रेजी में औपचारिक शिक्षा की डिग्री प्राप्त की थी। उन्होने अपने बच्चों को स्कूल में पढने और कड़ी मेहनत करने के लिये हमेशा प्रोत्साहित किया।
http://vinaykumarmadane.blogspot.in/
भीमराव रामजी आंबेडकर का जन्म ब्रिटिशों द्वारा केन्द्रीय प्रांत ( अब मध्य प्रदेश में ) में स्थापित नगर व सैन्य छावनी मऊ में हुआ था। वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की १४ वीं व अंतिम संतान थेI परिवार मराठी था और वो अंबावडे नगर जो आधुनिक महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले मे है, से संबंधित था। वे हिंदू महार जाति से संबंध रखते थे, जो अछूत कहे जाते थे और उनके साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था। अम्बेडकर के पूर्वज लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्यरत थे और उनके पिता, भारतीय सेना की मऊ छावनी में सेवा में थे और यहां काम करते हुये वो सूबेदार के पद तक पहुँचे थे। उन्होंने मराठी और अंग्रेजी में औपचारिक शिक्षा की डिग्री प्राप्त की थी। उन्होने अपने बच्चों को स्कूल में पढने और कड़ी मेहनत करने के लिये हमेशा प्रोत्साहित किया।
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